आस्तित्व

दिल की गहराईयों से |

4 Posts

20 comments

renukajha


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

Sort by:

Posted On: 15 Sep, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

में

0 Comment

जीवन जीने का नाम |

Posted On: 14 Sep, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 3.33 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

15 Comments

Hello world!

Posted On: 12 Sep, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: अजय यादव अजय यादव

प्रिय अनामिका, मुझे विश्वास है कि न तुम्हारी फोटो असली है और न नाम ही. हाँ, तुम्हारा दर्द असली है , इसलिए मेरी कविता की कुछ पंक्तियाँ तुम्हारे दर्द के नाम सपष्ट कर दूं कि वैसे तो प्रदीप नील ने बहुत कम कवितायेँ लिखी हैं और ज़बरदस्ती तो किसी को नहीं सुनाई, आज तक. लेकिन आपको मेरी कविता " मैं हत्यारा हूँ " से कुछ पंक्तियाँ सुना रहा हूँ: है कोई परमात्मा की बेटी इस पूरे ग्लोब पर, जो गर्व से सर उठाए और मुझे ये बताए कि आज तक किसी पुरुष ने उसे नहीं छेड़ा या सताया ? लेकिन मेरी पत्नी ने घर आ कर कभी नहीं बताया कि शहर के जंगल में आज फिर उसे किसी भेड़िए ने दबोचा पूरा ही चबा डाला या बस ज़रा सा नोंचा वो भेडिए से नहीं मुझसे डरती है कि मैं कमज़ोर पुरुष भाषण देने लगूंगा उसे छेड़े जाने का इलज़ाम भी उसी के सर धरूंगा अरे फैशन करके जाओगी तो ऐसा ही होगा सेक्स को तुम छलकाओगी तो ऐसा ही होगा . लेकिन वो जानती है कि भेडिए सिर्फ भेडिए हैं और नोंचना उनकी फितरत शिकार चाहे चार साल की बच्ची हो, सत्तर साल की बुढ़िया या सर से पाँव तक बुर्के में ढँकी औरत ............... (कविता बहुत लम्बी है, यह बहुत छोटा सा अंश है उसका. लेकिन सन्देश तुम्हे मिल गया होगा ) अब एक जादू की झप्पी. बस इतना याद रखना कि किसी भेड़िए की तरफ से नहीं है तुम्हारा एक इंसान

के द्वारा: प्रदीप नील प्रदीप नील

के द्वारा: renukajha renukajha




latest from jagran